श्रीमद्भगवद्गीता शाङ्करभाष्य - Bhagawat Gita Shankar Bhasya Gitapress [PDF]

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By Upayogi Books Posted on Nov 17, 2025
In Category - Upanishad
Gita Press Gitapress
Hindu
Latest 512 Hindi/ Sanskrit Indian

श्रीमद्भगवद्गीता शाङ्करभाष्य - Bhagawat Gita Shankar Bhasya Gitapress [PDF] 

 

शंकराचार्य का भगवत गीता भाष्य भगवद्गीता के मूल उपदेशों की अद्वैत वेदांत दृष्टिकोण से व्याख्या है, जिसमें उन्होंने गीता को ब्रह्म की प्राप्ति के लिए एक मार्ग के रूप में प्रस्तुत किया है। यह भाष्य श्लोकों की शाब्दिक व्याख्या करने के बजाय उनके गहन दार्शनिक अर्थ को स्पष्ट करता है और ज्ञान, कर्म, भक्ति और अद्वैत के माध्यम से मोक्ष का मार्ग बताता है। 

 

शंकराचार्य भाष्य की मुख्य बातें:

अद्वैत वेदांत पर आधारित: शंकराचार्य ने गीता की व्याख्या अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों के अनुसार की है, जिसके अनुसार केवल ब्रह्म ही सत्य है और बाकी सब माया है

 

मोक्ष का मार्ग: यह भाष्य गीता को केवल एक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि मोक्ष या आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने के एक प्रभावी साधन के रूप में देखता है।

 

व्याख्या का स्वरूप: यह श्लोकों का शाब्दिक अनुवाद करने के बजाय, उनके पीछे छिपे दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ को उजागर करता है।

 

ज्ञान और कर्म का समन्वय: शंकराचार्य ने बताया है कि कर्म और ज्ञान एक दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। कर्म के माध्यम से ही व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति होती है और ज्ञान से ही कर्म बंधनों से मुक्त हो पाता है।

 

आदि शंकराचार्य का प्रथम भाष्य: आदि शंकराचार्य ही वह पहले आचार्य थे जिन्होंने गीता पर एक पृथक और व्यवस्थित भाष्य लिखा।

 

सभी के लिए प्रासंगिक: यह भाष्य सभी के लिए है, क्योंकि यह केवल एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मानव समाज को ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता है। 

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