पञ्च रहस्य (श्रीलोकाचार्य स्वामीजी) Pancha rahasya (Sri Lokacharya Swamiji [PDF]
लोकचार्य स्वामी द्वारा रचित "अर्थ पंचक" (Artha Panchak) श्री वैष्णव संप्रदाय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मूलभूत ग्रंथ है, जिसमें मोक्ष प्राप्ति के पाँच आवश्यक विषयों का सारगर्भित वर्णन किया गया है।
"अर्थ पंचक" का शाब्दिक अर्थ है "पाँच आधार" या पाँच मुख्य विषय, जिन्हें जानना मोक्ष के इच्छुक व्यक्ति के लिए आवश्यक माना जाता है। ये पाँच विषय निम्नलिखित हैं:
प्राप्यस्य ब्रह्मणो रूपम् (प्राप्त करने योग्य ब्रह्म का स्वरूप): यह विषय भगवान (ब्रह्म) के दिव्य और मंगलमय स्वरूप का वर्णन करता है, जिन्हें भक्त प्राप्त करना चाहता है।
प्राप्तुः स्वरूपम् (प्राप्तकर्ता का स्वरूप): इसमें जीव (आत्मा) के स्वरूप का वर्णन है, जो भगवान का दास (शेषत्व) है।
प्राप्त्युपायः (प्राप्ति का उपाय): इस भाग में भगवान को प्राप्त करने के मार्ग या साधन बताए गए हैं। श्री वैष्णव दर्शन में इसमें मुख्य रूप से भक्ति योग और प्रपत्ति (शरणागति) शामिल हैं।
प्राप्तिविरोधी (प्राप्ति के मार्ग में आने वाली बाधाएँ): यह उन अवरोधों और दोषों की पहचान कराता है जो भक्त को मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने से रोकते हैं।
प्राप्तिफलम् (प्राप्ति का फल): अंतिम विषय मोक्ष या भगवत्प्राप्ति के अंतिम आनंद और दिव्य जीवन का वर्णन करता है, जिसे प्राप्त करने के बाद जीव का काम बन जाता है।
यह ग्रंथ श्री वैष्णव दर्शन के अनुयायियों को आध्यात्मिक जीवन के इन पाँच मूलभूत सत्यों को समझने और उनके अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देता है