भागवत पुराण, जिसे श्रीमद्भागवतम् या सिर्फ भागवतम् भी कहा जाता है, वैष्णव संप्रदाय का एक प्रमुख ग्रंथ है और हिंदू धर्म के 18 पुराणों में से एक है। यह भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करता है और भक्ति योग को प्रमुख विषय के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें वेदों और उपनिषदों के गूढ़ विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है, जिसमें 335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक हैं। मुख्य बिंदु रचयिता: पारंपरिक रूप से महर्षि वेद व्यास को इसका रचयिता माना जाता है। विषय-वस्तु: मुख्य रूप से भक्ति योग, जिसमें कृष्ण को सर्वोच्च ईश्वर के रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह ज्ञान, वैराग्य और विभिन्न उपाख्यानों का संग्रह भी है। रचना और संरचना: इसमें 12 स्कंध (भाग) हैं। लगभग 18,000 श्लोक हैं। महत्व: इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश माना जाता है। यह मन की शुद्धि, संशय निवारण और मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग बताता है। यह श्रीमद्भगवद्गीता से भिन्न है, जो महाभारत का हिस्सा है, जबकि भागवत पुराण भक्ति और कृष्ण की लीलाओं पर केंद्रित है। कथा: यह ग्रंथ संत शुकदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाया गया था, जो मृत्यु से पहले मोक्ष का मार्ग जानना चाहते थे।